शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET/CTET) को लेकर कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन-सर्विस शिक्षकों को TET योग्यता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान करते हुए अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। अब ऐसे शिक्षक 31 अगस्त 2028 तक TET या CTET उत्तीर्ण कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका संख्या 53434/2025 (उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनुजमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट) पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। न्यायालय ने पहले निर्धारित 31 अगस्त 2027 की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है।
परीक्षा आयोजन में व्यावहारिक चुनौतियों को माना आधार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि TET जैसी बड़ी परीक्षाओं के आयोजन में समय, संसाधन और प्रशासनिक तैयारियों की आवश्यकता होती है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यरत शिक्षकों को एक वर्ष का अतिरिक्त अवसर दिया जाना उचित है।
साथ ही, न्यायालय ने राज्य सरकारों और संबंधित परीक्षा प्राधिकरणों को निर्देशात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि TET परीक्षाओं का नियमित आयोजन किया जाए और संभव हो तो वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर मिल सकें।
बेसिक शिक्षा विभाग ने मांगी शिक्षकों की जानकारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने भी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। विशेष सचिव अवदेश कुमार तिवारी द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत विभिन्न जिलों से कार्यरत शिक्षकों की TET/CTET संबंधी जानकारी एकत्र की जा रही है।
इसी क्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।
मांगी गई जानकारी में क्या शामिल है?
विभाग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में निम्न बिंदुओं को शामिल किया गया है—
- प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या
- उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या
- TET/CTET उत्तीर्ण शिक्षकों का विवरण
- अब तक TET/CTET उत्तीर्ण न कर पाने वाले शिक्षकों की संख्या
हजारों शिक्षकों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग का मानना है कि समय-सीमा बढ़ने से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो अभी तक TET या CTET परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकारों और परीक्षा नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे नियमित अंतराल पर परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित करें।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उन्हें आवश्यक पात्रता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय और अवसर मिल सकेगा।







